उषा बारले परिचय पद्मश्री

 उषा बारले परिचय और पद्मश्री पुरस्कार





उषा बारले जो कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री से सम्मानित की गई हैं वे मूलतः छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं वे पांडवानी गायिका है पंडवानी के क्षेत्र में प्रमुख योगदान देने के लिए उषा बारले जी को पद्मश्री अवार्ड बुधवार, 23 मार्च 2023 को राष्ट्रपति भवन में प्रदान किया गया।

ऊषा बारले कापालिक शैली की पंडवानी गायिका हैं.
2 मई 1968 को छत्तीसगढ़ भिलाई शहर में जन्मी उषा बारले ने सात साल की उम्र से ही पंडवानी सीखनी शुरू कर दी थी।
बाद में उन्होंने तीजन बाई से इस कला की रंगमंच की बारीकियां भी सीखीं।

पंडवानी छत्तीसगढ़ के अलावा न्यूयॉर्क, लंदन, जापान में भी पेश की जा चुकी है. गुरु घासीदास की जीवनी को पंडवानी शैली में सर्वप्रथम प्रस्तुत करने का श्रेय भी उषा बारले को ही जाता है।

अपनी कला के उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ़ से गुरु घासीदास सामाजिक चेतना पुरस्कार दिया गया है।
कला के समीक्षकों की मानें, तो उषा का गायन महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है. उनका कहना है कि राज्य सरकार को पंडवानी की शिक्षा के लिए स्कूल खोलने चाहिए, जिसमें पंडवानी में रुचि रखने वाले बच्चों को शिक्षा दी जा सके।

श्रीमती उषा बारले ने अपनी प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश और विदेश में पहचान दिलाई है। उन्हें राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित होने पर छत्तीसगढ़ गौरवान्वित हुआ है।

उषा बारले पंथी संगीत के माध्यम से बाबा गुरू घासीदास के संदेशों को देश-दुनिया में प्रचारित और प्रसारित करने में अपना अमूल्य योगदान दिया है।

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